पृथ्वी पर नब्बे प्रतिशत शुद्ध पानी भूमिगत है। भूमिगत जल प्राकृतिक चट्टान संरचनाओं में पाया जाता है। इस फार्मेशनों को aquifers कहते है, ये एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है और कई चीजो मे उपयोग होता है। 53% जनसंख्या पानी के पीने के लिये भूमिगत जल स्रोत पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या और भी अधिक है, ग्रामीण समुदायो का लगभग अस्सी प्रतिशत हिस्सा पीने के पानी के लिये भूमिगत जल पर निर्भर है।
औद्योगिक, नगर और कृषि को जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोतो के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। नगर जल प्रदूषण मे शामिल है घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से उत्पन अपशिष्ट पदार्थ।
नगर जल प्रदूषण को रोकने के तीन चरण:
प्राथमिक उपचार: कन्कड हटाना, स्क्रीनिंग, पीस, और अवसादन|
माध्यमिक उपचार मे शामिल है: biologically सक्रिय मल का उपयोग करने के माध्यम से ऑक्सीकरण करना भंग कार्बनिक पदार्थ का। जो फिर से फ़िल्टर् किया जाता है।
तृतीय उपचार: उन्नत जैविक विधियों नाइट्रोजन और रासायन ह्टाने के लिये, जैसे कि बारीक निस्पंदन और कार्बन अवशोषण को सक्रिय क्ररना।
जल प्रदूषण की तीन अंतिम रूप पेट्रोलियम, रेडियोधर्मी पदार्थ और गर्मी के रूप में मौजूद हैं।
पेट्रोलियम अक्सर तेल के रूप में जल को प्रदूषित करता है, जैसे तटीय लाइनों से तेल का बिखरना, एक अनुमान है कि तेल के हर मिलियन टन मे से एक टन तेल बिखर जाता है। पेट्रोलियम द्वारा किये गया जल प्रदूषण केवल 0,0001 प्रतिशत के बराबर है। रेडियोधर्मी पदार्थ जो परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से कचरे के रूप में उत्पन्न होते हैं, चिकित्सा, औद्योगिक और वैज्ञानिक प्रयोग से उत्पन्न होता है। अंतिम रूप गर्मी है: तापमान मे हुई वृद्धि भी कई जलीय जीवो के स्माप्त होने का प्रमुख कारण है।